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CTET 7 Feb 2026 Paper 1 Hindi, Question 132

Topic: Reading comprehension

Passage

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है।

खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है।

प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं।

दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते।

Q132

घर तक चीजें लाने का माध्यम ______ होना चाहिए।

  1. (1) चिरंजीवCorrect answer
  2. (2) अल्पायु
  3. (3) अजर-अमर
  4. (4) प्लास्टिक का

Solution.

CBSE answer: (1)

उत्तर: (1) चिरंजीव

  1. अंतिम अनुच्छेद में लेखक पूछता है कि चीजें लाने का माध्यम इतनी कम उम्र का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने।
  2. अर्थात् थैला ऐसा हो जो लंबे समय तक बार-बार काम आए।
  3. ‘अल्पायु’ लेखक के मत का उलटा है।

सावधानी: ‘अजर-अमर’ प्लास्टिक के लिए व्यंग्य में कहा गया है; लेखक प्लास्टिक का माध्यम नहीं चाहता।